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    मधुमेह ने जोड़े मरीज ( इण्डिया टूडे 21 सितंबर 2005, पेज 48 )

    भी को हर महीने के पहले रविवार का बेसब्री से इंतजार रहता है-वे गोरखपुर मेडिकल कालेज में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ. जयन्तीकर हों या शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी रामनिवास, पूर्वोत्तर रेलवे में इंजीनियर वी. के. श्रीवास्तव हों या 15 साल तक रेडक्रॉस की सेवा में दुनिया नापते रहे के. सी. शर्मा महराजगंज के फरेंदा कस्बे की कुसुम श्रीवास्तव और देवरिया के बरहज की 9 वर्षीया सुकृति तो शनिवार को ही गोरखपुर आ जाती हैं। रविवार की सुबह ये और इनके जैसे 100 से भी ज्यादा लोग शहर के निपाल लॉज में इकट्ठे होकर दो घंटे तक मधुमेह से जुड़े विभिन्न विषयों और आयामों पर जमकर चर्चा करते हैं। प्रदेश ही नहीं, शायद देश भर में ‘मधुमेह रोगियों द्वारा संचालित’ अपने किस्म का यह पहला डायबिटीज सेल्फ केयर क्लब, गोरखपुर और आसपास के अपने 100 से भी ज्यादा मधुमेह रोगी सदस्यों के लिए वरदान- सा बन गया है।

    दो साल पहले शुरू हुए इस क्लब के सचिव, दवा की दुकान पर मैं अक्सर ऐसे मधुमेह रोगियों को आते-जाते देखता जिन्होंने लापरवाही या अज्ञानता के चलते बीच में दवा बंद कर दी और बाद में भारी मुसीबत मोल ले ली।’’ इस बीच तिवारी को भी अपने मधुमेह रोगी होने का पता चला। डॉक्टरों ने परामर्श दिया कि जागरूकता मधुमेह के खतरे को कम करने का सबसे बड़ा हथियार है। बकौल तिवारी,‘‘मुझे लगा कि ऐसे किसी प्रयास से बहुतों को लाभ पहुंच सकता है। इसी उधेड़बुन में मेरी भेंट डॉ. आलोक कुमार गुप्ता से हुई जो वर्षों से ऐसी कोशिशों में लगे हुए थे। सच पूछिए तो वे ही क्लब के प्रेरणा स्रोत हैं।

    डॉ. गुप्ता दरअसल पिछले एक-आध साल से हर माह के आखिरी शनिवार को दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक अपनी क्लीनिक में मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी व्याख्यान और विमर्श कार्यक्रम चला रहे थे। हर बार नये लोगों के आने से उन्हें व्याख्यान दोहराना पड़ता। लोग कभी आते, कभी नहीं आते। बकौल डॉ. गुप्ता ‘‘मुझे लगा कि जब तक रोगी अपना मंच नहीं बनाएंगे, उनमें संलग्नता की कमी रहेगी।’’ तिवारी से उनकी भेंट के बाद यह समस्या सुलट गई। दो साल पहले विश्व मधुमेह दिवस (6 नवम्बर) पर क्लब ने निःशुल्क जांच शिविर लगाया और लोगों को सदस्य बनने के लिए प्रेरित किया। उसी दिन 60 से ज्यादा लोगों ने सदस्यता ले ली।

    शुरूआती सदस्य जगदीश गुप्ता कहते हैं, ‘‘मात्र 50 रूपयें में आजीवन सदस्यता उस लाभ के आगे कुछ नहीं थी, जो हमें मिलने जा रही थी।’’ तय हुआ कि हर महीने के पहले रविवार को सदस्य मिलेंगे। जगह की समस्या लॉज वैलेस ने उदारता पूर्वक हल कर दी। अब क्लब जीवंत समुदाय है। इसके अध्यक्ष, शामियाना व्यवसायी कमल चैरसिया कहते हैं, ‘‘हम परिवार की तरह अपने सुख-दुख खुलकर बांटते हैं।’’ क्लब के सलाहकार डॉ. गुप्ता हर महीने व्याख्यानों की येाजना और व्यवस्था को अंतिम रूप देते हैं। उनके प्रयासों से समय-समय पर अनेक नामी विशेषज्ञ मधुमेह का भोजन, व्यायाम, आंखों, योग, सेक्स और पैरों से संबंध पर व्याख्यान देते हैं और सदस्यों की जिज्ञासाएं शांत करते हैं। गत वर्ष क्लब ने मधुमेह जनचेतना सप्ताह का आयोजन भी किया, जिसमें हर सुबह योगाभ्यास और उपयोगी व्याख्यान कराए गए, इसके समापन दिवस पर व्यवसायी रामनिवास ने कहा, ‘‘इन सात दिनों में मुझे यहां जो आनन्द मिला, अपने बेटे की शादी में भी नहीं मिला था।’’ उनके 7 भाइयों में से 5 मधुमेह के रोगी और इस क्लब के सदस्य हैं।

    दिलचस्प है कि मधुमेह से पीड़ित न होने वाले लोग भी इससे जुड़े हैं। चौरीचौरा के जीउतलाल जायसवाल और पूर्व रेडक्रॉस कर्मी के. सी. शर्मा ऐसे ही सक्रिय सदस्य हैं। बकौल शर्मा, ‘‘क्लब में शामिल होकर मैंने बहुत कुछ सीखा है। पर क्लब उन बच्चों के लिए वरदान साबित हुआ है, जो कम उम्र में इस रोग का शिकार हुए हैं। ऐसे बाल रोगी क्लब के न सिर्फ निःशुल्क सदस्य हैं, उनसे शुरूआती जांच और अस्पताल का खर्च भी नहीं लिया जाता। तिवारी बताते हैं, ‘‘16 वर्ष से कम उम्र के सभी रोगियों को क्लब इन्सुलिन (जांच) पेन मुफ्त देता है।’’ कुछ बाल रोगियों को 3,000/- रू0 मूल्य के ग्लूकोमीटर भी मुफ्त दिए गए। बकौल डॉ. गुप्ता, ‘‘शहर के 4 पैथॉलोजी केन्द्रों और दो नेत्र सर्जनों ने हर सदस्य की जांच या शल्य क्रिया फीस में 25 प्रतिशत की छूट का वादा किया है। क्लब अब जन जागरूकता कार्यक्रमों की सोच रहा है। गुप्ता कहते हैं, ‘‘देश में इस समय 3.5 करोड़ मधुमेह रोगी हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 2030 तक 7.94 करोड़ से भी ज्यादा हो जायेंगे। ऐसे में जागरूकता कार्यक्रम बढ़ाने की जरूरत है। क्लब के सदस्य हमारे ‘दूत’ हैं। वे प्रयास करेंगे तो नतीजे सार्थक होंगे। विश्व डायबिटिक फाउंडेशन की परियोजना ‘स्टेप बाई स्टेप’ में शामिल 115 चिकित्सकों में से एक डॉ. गुप्ता मधुमेह रोगियों को पैरों की देखभाल पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित करने की योजना को मूर्त रूप दे रहे हैं। हर वर्ष कोई 40,000 रोगियों को मधुमेह के चलते अपने पैर गंवाने पड़ते हैं। गुप्ता कहते हैं,‘‘जागरूकता इस खतरे को 75 फीसदी घटा सकती है।’’ क्लब की मदद से वे अपनी मुहिम में सचमुच सफल हो सकते हैं।

     
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